सत्य की राह – पायल भारद्वाज शर्मा

कितना मुश्किल है सत्य की राह पर आगे बढ़ना… झूठ आवाजें देता है बार बार पुकारता है पूरी शिद्दत से कि कमजोर पड़ जाओ तुम बस मुड़कर देखो तुम प्रतीक्षा करता है उस एक पल की जब भावनाओं का प्रबल प्रवाह क्षीण कर दे तुम्हारी इच्छाशक्ति और तुम पलट कर एक दृष्टि झूठ पर डालो उसी एक क्षीण क्षण में जकड़ लेता है तुम्हें संवेदनाओं का एक जाल भ्रमित करता है तुम्हें अपनी सम्मोहन शक्ति…

"सत्य की राह – पायल भारद्वाज शर्मा"

पत्थर में भगवान कहां…..?

पत्थर में भगवान कहां…..? मूक मूर्ति है मंदिर में, पत्थर में भगवान कहां। पत्थर दिल ये लोग हो गए, लोगों में इंसान कहां। मेरा धर्म मैं खुद देखूंगा, मत धर्म के ठेकेदार बनो। आखिर किस धर्म ने कहा, मासूमों पे अत्याचार करो। बेटी सी फूल सी बच्ची वो, तेरे हाथ ज़रा भी कांपे न। आंसू, दर्द, चीख-पुकार, गुहार को सुन तू भांपे न। क्या बीत रही होगी उसपे, क्या बीतेगी परिवार पे अब। क्या हवस…

"पत्थर में भगवान कहां…..?"

” परम सत्य ” – ( शारदा मेहता )

“परम सत्य” उस एक परम सत्य ने , हमेशा से सबको छला है । वो मृत्यु है , कर देता है चेतनाशून्य , सक्रिय शरीर को । बिना किसी आहट के, सेंध लगा जाता है इस शरीर में । खींच ले जाता है प्राण वायु , निस्पंद कर जाता है, इस काया को । निर्जीव कर जाता है । पूर्ण विस्राम दे जाता है । छोङ जाता है मिट्टी का काया , मिला देने के…

"” परम सत्य ” – ( शारदा मेहता )"