हाल अब कश्मीर वाले हैं – वरुण आनंद

ये शोखियाँ ये जवानी कहाँ से लाएँ हम, तुम्हारे हुस्न का सानी कहाँ से लाएँ हम मोहब्बतें वो पुरानी कहाँ से लाएँ हम, रुकी नदी में रवानी कहाँ से लाएँ हम हमारी आँख में पैवस्त एक सहरा है, अब ऐसी आँख में पानी कहाँ से लाएँ हम हर एक लफ्ज़ का मअनी तलाशते हो तुम, हर एक लफ्ज़ का मअनी कहाँ से लाएँ हम चलो बता दें जमाने को अपने बारे में, कि हर रोज…

"हाल अब कश्मीर वाले हैं – वरुण आनंद"

शायर वरुण आनन्द

यूं अपनी प्यास की ख़ुद ही कहानी लिख रहे थे हम सुलगती रेत पे ऊँगली से पानी लिख रहे थे हम یوں اپنی پیاس کی خود ہی کہانی لکھ رہے تھے ہم سلگتی ریت پہ انگلی سے پانی لکھ رہے تھے ہم मियाँ बस मौत ही सच है वहाँ ये लिख गया कोई जहाँ पर ज़िन्दगानी ज़िन्दगानी लिख रहे थे हम میاں بس موت ہی سچ ہے وہاں یہ لکھ گیا کوئ جہاں بس زندگانی…

"शायर वरुण आनन्द"

वरुण आनंद (शायर लुधियानवी)

सज़ा ए ज़ीस्त बढाने का काम करते हैं जो मेरी जान बचाने का काम करते हैं سزا ئے زیست بڑھانے کا کام کرتے ھیں جو میری جان بچانے کا کام کرتے ھیں हमारा नाता है उस क़ैस के घराने से कि हम भी ख़ाक उड़ाने का काम करते हैं ہمارا ناتا ھے اس قیس کے گھرانے سے کہ ہم بھی خاک اڑانے کا کام کرتے ھیں हमारी आँख के अश्कों को रायेगाँ न समझ ये…

"वरुण आनंद (शायर लुधियानवी)"