” अब इन्तेजार नहीं तुम्हारा ” – आयुषी श्रीवास्तव

सुनो, अब इंतेज़ार नही है तुम्हारा क्योंकि कुछ वादे कर तुम भूल चुके हो इंतेज़ार, नही है अब तुमको अपनी बाहों में भरने का क्योंकि अब तक तो तुम किसी और कि बाहों में खुद को खो चुके हो इंतेज़ार, नही हूँ तुम्हारे दिन को खास बनाने का क्योंकि अब तुम उस दिन को किसी और के साथ ख़ास बनाते हो इंतेज़ार, नही है कि तुम मुझे मेरी जगह दो क्योंकि वो जगह तो टीम…

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