Change of image’s season -” Sourabh Shandilya “

चलने लगी है हवाएँ, सागर भी लहराये ——————————————————————– अभिजीत से हमारा राब्ता इसी गाने से हुआ था । उस दौर में एल्बम का बङा क्रेज़ था और उसमें अभिजीत सबसे फिट बैठते थे । इस गाने को हमने सीडी पर तब देखा था जब हमारे बङे भाई लोंगो के किताबों में रवीना , ऐश्वर्या, माधुरी राज करती थी । और अपने क्रश को वे लोग मोटे – मोटे किताबों के बीचों बीच दबा के रखते…

"Change of image’s season -” Sourabh Shandilya “"

“One dream it was…” by Mohit Sharma

A mask of a mask , a face of a face An angel dancing with the demon’s grace On the song of god , sung by sinners Chasing the losers , denying the winners Aah ! you wonderful face of pride You fighter unknown , you wings of flight Betray ! Betray ! This world insane , Let’s restart this senseless game……! Mohit Sharma One dream it was… just a little dream Of having a…

"“One dream it was…” by Mohit Sharma"

कवि मयंक मिश्रा ” रायबरेली “

जो बीत गया है वो कभी आ नही सकता कोई वक़्त से पहले यहा कुछ पा नही सकता जीवन है एक अनमोल सफर देखकर चलना कुदरत का भजन कर कोई ठुकरा नही सकता कवि मयंक मिश्रा रायबरेली   मेरा दिल तोड़ने वाले तेरा दिल टूट जायेगा। सवेरा है तो मुस्कालो अँधेरा भी तो आयेगा समय अच्छा तो सब संग हैं मगर इतना न इतराओ । बुरा जब वक़्त होगा तो न कोई पास आएगा। कवि…

"कवि मयंक मिश्रा ” रायबरेली “"

गर तुम पढ़ लेती

बात बेबात ऐसे न सताओ उनको जख्म दो पर ऐसे न भुलाओ उनको ये जो आखों में रखे है मोती थोड़े ये अमानत है ऐसे न लुटाओ उनको बातो बातो मे ऐसे न बहलाओ उनको जरा सी बात है थोड़ा सा मनाओ उनको वो मान जाएगें ऐसी तो कोई बात नही ये तो अपने है ऐसे न रूलाओ उनको – आशुतोष पाण्डेय शब्द सा तुम बनी, अर्थ मै हो गया। आत्मा तुम बनी, देह मै…

"गर तुम पढ़ लेती"

“वो गज़ल और हम”- राहुल कुमार (लेखक)

आज आख़री दफ़ा तन्हा हुवे हैं हम, पहली दफ़ा ग़ालिब समझ मे आये। ……..राहुल कुमार लिए हस्ती अपनी जब गुमनाम से मिलते हैं, अब मेरे लोग भी मुझको तेरे नाम से मिलते है। मग़रूर हो तुम भी तो हमे भी कोई जल्दी नही, चलो तो फिर तुमसे कभी आराम से मिलते हैं। …….राहुल कुमार रफ़ीक सारे अपने दुनिया-दारी में लगे हैं, हम बेवक़्क़त अब भी शायरी में लगे हैं। आफ़ताब को पहली दफ़ा सक हुवा…

"“वो गज़ल और हम”- राहुल कुमार (लेखक)"

“जल का तांडव”- मनोगुरू

“जल का तांडव” सैलाब के सितम ने देखो , आशियानों को डुबाया है…. जी रहे परिवार कोे संग , जीते जी ही बहाया है….. आपदा का स्वरूप धर यूँ , जल ने तांडव दिखाया है…… अब कष्टरूपी बारिश में देखो, जीवन कैसे नहाया है….. तन,धन,जन,अन्न भी , जल की जलन ने जलाया है…. खुशनुमा था हाल सबका , उनको भूखा रुलाया है …. सैलाब के सितम ने देखो , अरमानों को ढहाया है , बैर…

"“जल का तांडव”- मनोगुरू"

“माँ-बाप हैं , कोई बोझ नहीं” -मनोगुरू

माँ-बाप हैं , कोई बोझ नहीं अरमान देख उनके, सब कुछ लुटा दिया, सम्मान देखा उनका , ये सर ही झुका दिया… देखा जो गिरते उनको , हाथों से उठा दिया कोई कभी माँ-बाप ना उनका, कहकर रुला दिया अब हम उम्र की दहलीज पर, तो ख्यालों से गिरा दिया अभिषेक त्रिपाठी ‘मनोगुरू’ ↑….↓ + kavyana (Anamika) कम्बख्त वक्त का रुख देखो , बिन आस के हम जीते देखो…. हर साँस में बसता “वो” अब…

"“माँ-बाप हैं , कोई बोझ नहीं” -मनोगुरू"

महफिल – ए – शायरी ( 1 )

नीलू @The sapphire30 ↓ काश तू मेरी आँखों का आँसू बन जाए तुझे खोने के डर से मैं रोना छोड़ दूँगी + अभिषेक त्रिपाठी ‘मनोगुरू’ @dark days diary ↓ माना कि तेरी आँखों का आँसू बन जाऊँ, पर डर है कहीं बन आँसू ही ना बह जाऊँ…..   @kish mehra ↓ क्या खूब दिल छलनी करते हैं शायर महबूब के पहले इश्क के शेर…. + @dark days diary ↓ माना दिल छलनी करते हैं, महबूब…

"महफिल – ए – शायरी ( 1 )"