कवि मयंक मिश्रा ” रायबरेली “

जो बीत गया है वो कभी आ नही सकता कोई वक़्त से पहले यहा कुछ पा नही सकता जीवन है एक अनमोल सफर देखकर चलना कुदरत का भजन कर कोई ठुकरा नही सकता कवि मयंक मिश्रा रायबरेली   मेरा दिल तोड़ने वाले तेरा दिल टूट जायेगा। सवेरा है तो मुस्कालो अँधेरा भी तो आयेगा समय अच्छा तो सब संग हैं मगर इतना न इतराओ । बुरा जब वक़्त होगा तो न कोई पास आएगा। कवि…

"कवि मयंक मिश्रा ” रायबरेली “"

गर तुम पढ़ लेती

बात बेबात ऐसे न सताओ उनको जख्म दो पर ऐसे न भुलाओ उनको ये जो आखों में रखे है मोती थोड़े ये अमानत है ऐसे न लुटाओ उनको बातो बातो मे ऐसे न बहलाओ उनको जरा सी बात है थोड़ा सा मनाओ उनको वो मान जाएगें ऐसी तो कोई बात नही ये तो अपने है ऐसे न रूलाओ उनको – आशुतोष पाण्डेय शब्द सा तुम बनी, अर्थ मै हो गया। आत्मा तुम बनी, देह मै…

"गर तुम पढ़ लेती"

“वो गज़ल और हम”- राहुल कुमार (लेखक)

आज आख़री दफ़ा तन्हा हुवे हैं हम, पहली दफ़ा ग़ालिब समझ मे आये। ……..राहुल कुमार लिए हस्ती अपनी जब गुमनाम से मिलते हैं, अब मेरे लोग भी मुझको तेरे नाम से मिलते है। मग़रूर हो तुम भी तो हमे भी कोई जल्दी नही, चलो तो फिर तुमसे कभी आराम से मिलते हैं। …….राहुल कुमार रफ़ीक सारे अपने दुनिया-दारी में लगे हैं, हम बेवक़्क़त अब भी शायरी में लगे हैं। आफ़ताब को पहली दफ़ा सक हुवा…

"“वो गज़ल और हम”- राहुल कुमार (लेखक)"

“जल का तांडव”- मनोगुरू

“जल का तांडव” सैलाब के सितम ने देखो , आशियानों को डुबाया है…. जी रहे परिवार कोे संग , जीते जी ही बहाया है….. आपदा का स्वरूप धर यूँ , जल ने तांडव दिखाया है…… अब कष्टरूपी बारिश में देखो, जीवन कैसे नहाया है….. तन,धन,जन,अन्न भी , जल की जलन ने जलाया है…. खुशनुमा था हाल सबका , उनको भूखा रुलाया है …. सैलाब के सितम ने देखो , अरमानों को ढहाया है , बैर…

"“जल का तांडव”- मनोगुरू"

“वो बे-गुनाह थी”- मनोगुरू

1.↓ “वो बे-परवाह शख्स” ↓ जूझ बैठा आज मन , बस ख्वाब में उस शख्स से पूछ बैठा आज सुन , शीशे में अपने अश्क से…. बेवक्त ही क्या वक्त माँगा …? सिरफिरे कम्बख्त ने…… वक्त था पर ना दिया, उस दिल-ए-सख्त ने…… वक्त भी बे-वक्त बोला, माँगा ही क्यूँ उस शख्स से…? सख्त था जो ना दिया, उस दिल-ए-कम्बख्त ने…… सूझ बैठा आज क्यूँ , जूझने को अश्क से पूछ बैठा आज क्यूँ ,…

"“वो बे-गुनाह थी”- मनोगुरू"

“तेरा ना होना बेहतर है” – मनोगुरु

वो थी तब खुश था वो थी तब खुश था, जो अब नाखुश है…. .वो थी सब कुछ था, जो अब ना कुछ है…. .‘वो’ और ‘मैं’ तब “हम” थे , जो अब ना हम हैं… .वो थी गम कम थे , जो अब गम नम हैं…. वो साथ थी , तब दम था… जो बात भी , अब कम है.. .बेशक दूरियाँ हैं , औ गम हैं पर आज भी हम , “हम” हैं……

"“तेरा ना होना बेहतर है” – मनोगुरु"

“जिद जुनून जीत” — मनोगुरू

गिन मत कदम मंजिल से पहले, वो खुद शुमार होंगे तेरी जश्न-ए-फतह में…. -अभिषेक “मनोगुरू” Collab with = Shiwam pathaur + Sharda Khakre + मनोगुरू (Dark Days Diary)…… on your quote app. वो चिराग दीपक समझ , बुझता सा दिख रहा है पर वो सिरफिरा बेफिक्र हो, तकदीर लिख रहा है… अभिषेक “मनोगुरू” थी हमारी भी तमन्ना आसमान छूने की, पर काट लोगों ने ज़मीन में दफ़नाया अतुल हिन्दुस्तानी जो कर प्रयास बेधुंध आसमां छू…

"“जिद जुनून जीत” — मनोगुरू"