Valentine in Metro – Manoguru

रोहित का,उसके गिरते हुए आंसुओं को देखते देखते ध्यान हाथों के मंजर पर पड़ा । अपनी उंगलियों से गुलाब की उन पंखुड़ियों को इस तरह मसल रही थी वो ,मानो आज का ये ज़ख्म गुलाब के ही काँटे ने दिया हो । खैर वो आज गुस्से में इतनी खोई हुई थी कि गुलाब तो कब का खाक हो चुका था अब तो वो अपनी उंगलियों का हाल बेहाल कर रही थी अंजाने में ही सही। रोहित के सामने का यह मार्मिक द्रश्य इतना दर्दनाक था कि उस शख्श से कोई नाता ना होते हुए भी भावुक हो रहा था मन। लड़की के मोबाइल पर कोई बार-बार कॉल कर रहा था और वो गुस्से में उसे उठा नहीं रही थी । एक-दो बार उठाया भी तो चिल्लाते हुए कहा कि – ” कहा ना कि नहीं करनी तुमसे बात , जाओ तुम्हें जो करना है करो “। अब तक कोई नादान भी इस वाक़िये की गहराई को समझ गया होता तो फिर रोहित क्या चीज है । कहानी के पहले हिस्से में ही बता दिया था कि रोहित काफी भावुक लड़का है । अब वह सोच रहा था कि कब मौका मिले और लड़की से बात कर सके । वह चाहता था कि अभी लड़की को एक पल का सुकून दे सके । वक्त गुजरता जा रहा था और इस मेट्रो के बाद अंतिम मेट्रो थी । रोहित की दीदी भी इन्तेजार कर रही थी क्योंकि काफी रात हो रही थी और मेट्रो के बंद होने का वक्त भी हो रहा था । पर दूसरी ओर रोहित उस वक्त के नजदीक ही था जब लड़की से जान पायेगा की आखिर हकीकत क्या है । तभी मेट्रो साकेत स्टेशन पर रुकी और वो लड़की रोती हुई उतरने लगी । रोहित ने भी अंतिम मेट्रो और रात का ख्याल ना करते हुए वहीं उतरना बेहतर समझा । लड़की तेजी से आगे बढ़ी जा रही थी और रोहित पीछे-पीछे । अरे सुनो…! रोहित ने आवाज दी
तभी लड़की ने पीछे मुड़कर देखा । रोहित चेहरे पर हल्की सी मुस्कान रख नजदीक गया और बोला कि , “तुम रोती हुई अच्छी नहीं लगती , अब बंद भी करो रोना”। लड़की हैरान थी कि जिसे वह जानती भी नहीं , वह चुप होने के लिए कह रहा है । रोहित फिर बोला कि, ” तुम्हारे हाथ में ये गुलाब बता रहा है कि तुम किसी अपने से मिलने गई थी पर वहाँ से खुशी के बजाय आँसू लेकर आ रही हो ” । अब छोड़ भी दो उसे , जिसे तुम्हारे प्यार की परवाह ही नहीं। माना कि इतना आसान नहीं होता किसी को अपना बना कर छोड़ देना पर ना जाने क्यूँ मेरा दिल कह रहा है कि , “वो जो भी हो , तुम्हारे लिए बेहतर नहीं । रोहित को खुद नहीं पता कि वह क्या , क्यूँ और किससे कह रहा है लेकिन दो-तीन मिनट यह सब कुछ कहने के बाद जब वह शांत हुआ तो वो लड़की उसकी बाँहो में थी । लड़की रोहित के गले लिपटकर काफी रो रही थी ,मानो आज सारे आँशू यहीं खाली खत्म करके ही जाएगी । रोहित भी अब राहत की सांस ले रहा था क्यूँकि किसी रोते हुए इंसान के चेहरे पर मुस्कान लाना काफी मुश्किल होता है और आखिर आज के दौर में बहुत कम लोग ही ऐसा करते हैं । लड़की ने आँसू पोंछकर चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लायी । अब वह काफी हद तक खुश लग रही थी औ रोहित से कुछ कहना भी चाहा कि तब तक मेट्रो आ गई ।रोहित भी शायद कुछ और देर रुकना चाह रहा था पर नामुमकिन था क्योंकि ये आज रात की आखिरी मेट्रो थी और वहाँ दीदी इन्तेजार भी कर रही थी ।दोनों ने हाथ मिलाया और फिर से लड़की ने रोहित को गले लगाकर कहा कि , ” अब कभी नहीं रोऊँगी “। रोहित अब मेट्रो में था और उसकी नजरें कांच से बाहर झाँककर उसी को देख रही थी , जब तक वो नजर आ रही थी तब तक ही सही । रोहित अपने अंतिम पड़ाव पर था और बेहद खुश भी । अब उसे याद आया कि आज तो वैलेंटाइन डे था । तो ये थी रोहित की मेट्रो में वैलेंटाइन वाली दास्तान जो अब तक भुला नहीं पाया है वो और आखिर भुलाए भी क्यूँ?

अंततः रोहित भले ही काल्पनिक नाम था पर वो रोती हुई लड़की “आयशा” थी ।

– Manoguru

Manoguru

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