वो आज भी जिंदा हैं…- manoguru

उस गाँव में वो हरे-भरे पेड़ , चहचहाते पक्षी ,

कोलाहल करती कहीं बच्चों तो कहीं युवाओं की टोलियाँ , वहीं नुक्कड़ पर बुजुर्गों की गपशप वाली चर्चाएँ तो कहीं खेत की ओर जाते किसान…

और भी बहुत कुछ मानो संसार का हर द्रश्य एक ही जगह बसता हो । कढी़ मेहनत और उम्मीद का दामन थामे हर परिवार खुशियों से जीवन व्यतीत कर रहा था।

क्यूँकि यहाँ ना तो वो शहर वाली पानी की कमी थी और ना ही वो दम घोंटने वाली हवा । दो वक्त का ही सही लेकिन परिवार के साथ किया गया भोजन आपके शहरी ठाठ वाले बर्गर (Burger) , पिज्जा़ (Pizza) , से कई गुना स्वादिष्ट और शुद्ध भी होता था ।

कुछ ऐसा था शहर से दूर नदी किनारे बसे उस गाँव का जीवन जो फिलहाल अन्जान था अपने आने वाले भयावह कल से खैर कल देखा भी किसने है

रोज की तरह उस रात भी सब सोए ही थे कि अचानक तेज हवाएँ और भारी बारिश , मानो कि हवाएँ पैगाम ले और बारिश इन्तकाम बन आईं थी।अब कुछ चीखने चिल्लाने की आवाजें भी साफ-साफ सुनाई दे रही थी ।पानी-पानी, भागो , सामान , मेरा बेटा , माँ माँ , हाय मेरा मकान जैसी मिली हुई आवाजेंऔर चीखें जिन पर वो उस बाढ़…. हाँ हाँ…! सही सुना “बाढ़” के रूप में तांडव करती हुई सबके अरमानों और साथ साथ आशियानों पर मातम का पानी फेरती हुई बेफिक्री से बढ़ी जा रहा थी ।

वही जल जो कभी उनकी प्यास के साथ साथ रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करता था , आज उसी गाँव में वैसा ही पानी काल बन जीवन को ही जलाता जा रहा था । पल भर में मानो सब कुछ तबाह सा कर दिया जैसे सदियों पुरानी किसी गहरी रंजिश का बदला लिया हो शायद । हर बार की तरह सुबह भी हुई लेकिन दर्द भरी खौफनाक मंजर वाली सुबह ।

अब तक ना जाने क्या कुछ अपने आगोश में ले लिया था उस बाढ़ ने और हाँ बचे भी थे तो वो मायूस व मासूम बिलखते चेहरे जो अब तो खुद से भी बुरी तरह खफा नजर आ रहे थे । कुछ पानी में उतराते परिवार….

जो अब किसी बेकार समझ फेंके हुए लग रहे थे और सदमे में सहमी हुई आस कि कभी ना कभी हम फिर से बसेंगे तो जरूर । कोई तो आएगा इंसान सा ही मगर हमारे उजड़े चमन के लिए फरिश्ता बन जो इस दर्द को समझेगा भी ।

वो गाँव वाले भी जिएँगे जरूर क्योंकि इस बाढ़ ने बेशक
बहुत कुछ तोड़ दिया था मगर फिर भी नहीं तोड़ पाई वो उम्मीद , और मानव के जिद्दी जज्बात जिंदगी को जीने के लिए । गाँव फिर से बसेगा और खुशियों से जिएगा भी उसी जिंदगी को………..

Dedicated to them who have faced flood but they are living happily once again….
Per year many countries , cities , village , etc. Strands there life in flood but continuously struggling in hope of better tomorrow…..

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Manoguru

Hey...! My name is Abhishek Tripathi and pen name "Manoguru". Thanks a lot to be a member of my life by my these startups. I hope that you are easily understand me and my aim to change something in everyone. You know that -" Nobody can do everything but Everybody can do something". so activate your inner powers, talent, sensitivity , sincerity etc. Be a helping human... keep connected....... thanks again

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